“Letter’s to Delhi…

प्रिय दिल्ली, ख़त लिखना बहुत पसंद है मुझे। मगर आजकल कोई है ही नहीं जिसे ख़त भेजूँ,आख़िर पढेगा कौन। फ़िर तुम्हारा ख़्याल आया। सोचा,तुमसे ही बांटा जाए कुछ। एक बात कहूँ , बुरा मत मानना, मुझे तुम कभी पसंद नहीं थे। बीस साल से ज़्यादा चले थे तुम मेरे साथ,मग़र…